कुंडली मेलापक
माता-पिता के पश्चात् जीवनसाथी ही मनुष्य का निकटतम संबंधी होता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ उसकी आगामी पीढ़ियों के गुण-दोषों पर भी पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में 'मेलापक' वह विधि है, जिसके माध्यम से दो अपरिचित युगलों की प्रकृति, अभिरुचि और उनके गुण धर्म प्रकृति आदि का गहन विश्लेषण किया जाता है। विवाह संस्कार से पूर्व केवल अष्टकूट मिलान ही पर्याप्त नहीं होता, अपितु वर की कुण्डली से उसके स्वास्थ्य, चरित्र व सक्षमता और कन्या की कुण्डली से उसके स्वभाव, आयु व प्रजनन क्षमता आदि का विचार करना अनिवार्य होता है। समान स्वभाव और पूरक ग्रहों वाले युगलों का साथ ही दीर्घकाल तक सुखद रहता है, अन्यथा सर्वगुण संपन्न व्यक्ति भी श्रेष्ठ जीवनसाथी सिद्ध नहीं हो पाता। अतः एक सामंजस्यपूर्ण और समृद्ध वैवाहिक जीवन की सुनिश्चितता हेतु विद्वान् ज्योतिषियों से कुण्डली मेलापक का परामर्श अवश्य लें।
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लक्ष्मण द्विवेदी
परंपरागत ज्योतिष एवं वास्तु ने मुझे प्राचीन ज्ञान से जोड़कर भगवद् गीता के माध्यम से जीवन के लिए मूल्यवान मार्गदर्शन दिया है।
लक्ष्मण द्विवेदी
आरती कृष्णन
परंपरागत ज्योतिष एवं वास्तु के पॉडकास्ट सच में प्रेरणादायक हैं। भगवद् गीता पर चर्चा और उसके सिद्धांतों को रोज़मर्रा के जीवन में अपनाने की सीख ने मेरे जीवन को सकारात्मक रूप से बदल दिया है। Via Veda प्राचीन ज्ञान और आधुनिक चुनौतियों का सुंदर समन्वय प्रस्तुत करता है। हमारे साथ आत्म-खोज और परिवर्तन की इस यात्रा की शुरुआत करें।
आरती कृष्णन
प्रिया गुप्ता
मेरा परामर्श अनुभव बेहद ज्ञानवर्धक रहा। मुझे जो मार्गदर्शन मिला, वह सूझबूझ भरा और मेरे जीवन से जुड़ा हुआ था। Via Veda के पेशेवर सलाहकारों की वजह से यह ज्ञान ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हो पाया।