Traditional astro vastu

।।श्रीः।।
ज्योतिषां पतये नमः।।

कुंडली मेलापक

माता-पिता के पश्चात् जीवनसाथी ही मनुष्य का निकटतम संबंधी होता है, जिसका प्रभाव व्यक्ति के जीवन के साथ-साथ उसकी आगामी पीढ़ियों के गुण-दोषों पर भी पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में 'मेलापक' वह विधि है, जिसके माध्यम से दो अपरिचित युगलों की प्रकृति, अभिरुचि और उनके गुण धर्म प्रकृति आदि का गहन विश्लेषण किया जाता है। विवाह संस्कार से पूर्व केवल अष्टकूट मिलान ही पर्याप्त नहीं होता, अपितु वर की कुण्डली से उसके स्वास्थ्य, चरित्र व सक्षमता और कन्या की कुण्डली से उसके स्वभाव, आयु व प्रजनन क्षमता आदि का विचार करना अनिवार्य होता है। समान स्वभाव और पूरक ग्रहों वाले युगलों का साथ ही दीर्घकाल तक सुखद रहता है, अन्यथा सर्वगुण संपन्न व्यक्ति भी श्रेष्ठ जीवनसाथी सिद्ध नहीं हो पाता। अतः एक सामंजस्यपूर्ण और समृद्ध वैवाहिक जीवन की सुनिश्चितता हेतु विद्वान् ज्योतिषियों से कुण्डली मेलापक का परामर्श अवश्य लें।

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