गृह निर्माण हेतु उत्तम मानचित्र
वास्तुशास्त्र वस्तुतः वह प्रकल्प है जिसमें लोगों के लिए सौविध्य व सुरक्षा प्राप्ति के नियमों, सिद्धान्तों व प्रविधियों का विचार किया जाता है । ज्योतिष और वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार, उत्तम मानचित्र वह है जो पंचतत्वों के संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो। शास्त्रों का स्पष्ट मत है कि किसी भी संदिग्ध दिशा अथवा विदिशा भूखंड पर भवन का निर्माण कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि दिशाओं का अल्प-सा विचलन भी गृहस्वामी के स्वास्थ्य, यश और आर्थिक प्रगति को नष्ट कर सकता है। जिस प्रकार एक अशुद्ध बीज से वृक्ष फलदायी नहीं होता, वैसे ही दोषपूर्ण मानचित्र पर निर्मित भवन कभी कल्याणप्रद नहीं हो सकता। भवन निर्माण के पश्चात उसमें सुधार करना अत्यंत दुष्कर और व्ययसाध्य होता है। अतः यह अनिवार्य है कि आप अपने सपनों के महल की नींव रखने से पूर्व ही उसकी शास्त्रीय शुद्धता सुनिश्चित कर लें। भविष्य में होने वाली मानसिक अशांति और गलत निर्माण की अपरिवर्तनीय त्रुटियों से बचने हेतु, कार्य प्रारंभ करने से पूर्व ही विशेषज्ञ वास्तुविदों से मानचित्र के निर्माण हेतु परामर्श लें सकतें हैं ।
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लक्ष्मण द्विवेदी
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